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Wednesday, February 10, 2010

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम, ,,,,,,,

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,

कविता में पिरे

शब्दों की व्यजंना हो तुम,

मर्म-स्पर्शी नव साहित्य की

सृजना हो तुम,

नव प्रभा की पथ प्रदर्शक

लालिमा हो तुम,

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,

स्वप्न दर्शी सुप्त आखों में

बसी तलाश हो तुम,

सावन की कजरी में घुली

मिठास हो तुम,

चन्द्र नगरी के चन्द्र रथ पर

सवार एक सुन्दरी हो तुम,

रस भरे अधरों के अलिंगन की

कल्पित एक स्वप्न परी हो तुम,

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम ...........

Tuesday, May 12, 2009

अनसुलझा सा कुछ ये रिश्ता आज भी है

कुछ भी सही लगता रहा न जाने क्यों गलत होते हुए भी ? हमेशा से एक तलाश अधूरी लिए दिल के कोने में कभी नहीं भटका अचानक ही कुछ ऐसा जिसकी मुझे जरूरत थी पर शायद उम्मीद तो कभी भी न थी । पहली मुलाकात की याद शायद ही कभी जेहन से उतर पाये । इन सब के बीच खुद इतना खुश हो जाना था जिसको किसी के सामने दिखाया और बताया न जा सकता है ।
हम किसी ट्रेन या बगीचे या फिर राह चलते न मिले थे हमको तो बस मिलना था इसलिए मिले थे । कहीं कोई जान पहचान न होते हुए भी अजनबी न थे । मोबाइल का जमाना मेरे लिए अच्छा रहा प्यार की शुरूआत से लेकर अंत तक साथ रहा । इसलिए इसका शुक्रगुजार हूँ । किस्मत ने टक्कर दी और मैं न जाने क्यों वो कर बैठा जिसको मैं कभी न कर सकता था । धीरे धीरे हम इतने पास पास हुए कि दूर होने का गम पल पल घुटन देता । कहते हैं कि ज्यादा प्यार हो तो फिर वहां पर कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर होने वाला है । एक साल में मिलाने से लेकर बिखराब तक का सफर तय कर लेने के बाद भी आज जब सोचता हूँ मैं सब बातों को तो न जाने एक विश्वास अब भी कायम सा लगता है जो कि है ही नहीं ।
मुझे लगता रहा है कि मैंने जो किया वह सही है पर फिर भी अकेला हूँ क्यों ? शायद इसका जवाब मेरे पास नहीं है और न कभी होगा । इसंान अपनी हार पराजय को बहुत ही मुश्किल से स्वीकार करता है और मैं उनमें से हूँ हार कर भी न जाने जीत का एहसास पाता है । दूर रहने से कोई रिश्ता कमजोर नहीं होता बल्कि और मजबूत ही होता लगा मुझे । लड़ाई करके किसी को भूलना हो ही नहीं सकता बल्कि और भी पास आ जाते हैं । गिले शिकवे जरूर होते हैं पर प्यार और भी ज्यादा ।

ये सब समझाना चाहता था मैं पर कभी सफल नहीं हो पाया हूँ मैं न जाने क्यों या फिर वो समझना ही न चाहते हो । जो भी है आज मेरे पास शुकून और दुख दोनों देता है ।