Friday, May 15, 2009

आज शाम

आज की शाम मैं अकेला हूँ दूर दुनिया से तुम्हारे बिना शायद खामोश जुबान ही जता रही है तुम्हारी कमी को ..........पेड़ चुपके कह रहें हैं मुझसे , हवाएं अपनी सरसराहट से दिखा रही है रास्ता , चिड़िया चहचहाकर बतला रही है ये कि तुम नहीं हो ...........हमारा साथ इनको भी पता । जो कह नहीं सकते कुछ पर अपने इशारों से दिखा रहे हैं तुमको । मेरा वक्त अब इन सबसे दूर है तुम्हारे बिना कैसे कोई बताये तुमको कि तुम बिन सब अधूरा है ...........

9 comments:

  1. bahut khub nishu ji dard hai

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  2. bahut khub neeshoo accha likha

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  3. dost kamal ka likte ho padh kar mja aa jata hai

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  4. नीशू जी , आपको बधाई सुन्दर भावपूर्ण लेखन के लिए

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  5. neeshoo ji ,

    aapki lekhni ki jai ho bhai , yaar itna accha accha likhte ho .. boss , kavitayen likho yaar .. aapke lekhan me gazab ki pratibha hai ..

    itni acchi rachna ke liye badhai ..............

    Regards,

    Vijay

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  6. भावनात्मक सुन्दर अभिव्यक्ति है शुभ्कामनायें

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